स्वामी विवेकानंद ने अपने आध्यात्मिक आकर्षण से उन्होंने समूचे विश्व का दिल जीता था- डॉ. मुरलीधर चांदनी वाला


रतलाम ।  जरूरी नहीं कि हम विश्व गुरु बनने के लिए अन्य देशों पर आक्रमण करें या उन्हें अपने अधीन करने के लिए शक्ति और समर्थ का प्रयोग करें ।  जगतगुरु बनने के लिए तो केवल और सिर्फ केवल आध्यात्मिक चक्रवर्ती होना जरूरी है । स्वामी विवेकानंद जो भारत की आध्यात्मिक प्राचीन शक्तियों का प्रतिबिंब थे अपने आध्यात्मिक आकर्षण से उन्होंने समूचे विश्व का दिल जीता था शिकागो सम्मेलन न सिर्फ एक धार्मिक सम्मेलन था अपितु मानव जाति के अस्तित्व का सर्वप्रथम वैश्विक घोषणा पत्र था जिसमें उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व कर एक चक्रवर्ती सम्राट की तरह भारत का दर्शन प्रस्तुत किया था। उक्त उदगर स्वामी विवेकानंद जयंती युवा दिवस के अवसर पर शिक्षक सांस्कृतिक संगठन द्वारा लाइंस हाल में आयोजित व्याख्यान स्वामी जी एक मूर्धन्य व्यक्तित्व विषय पर व्याख्यान देते हुए प्रसिद्ध साहित्यकार चिंतक डॉ. मुरलीधर चांदनी वाला ने व्यक्त किए ।  आपने कहा कि वास्तव में धर्म क्या है, धर्म के मूल्य क्या है, धर्म का उद्देश्य क्या है, धर्म से लाभ क्या है, धर्म कैसा होना चाहिए, धर्म की अवधारणाएं स्वामी जी ने सही अर्थों में स्थापित की थी । वह अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के सानिध्य में आने के पूर्व अपने धर्म और ईश्वर के प्रति बहुत असमंजस में थे उन्हें इन प्रश्नों का उत्तर नहीं मिल पा रहा था कि ईश्वर क्या है और धर्म क्या है । लेकिन परमहंस ने उन्हें न सिर्फ धर्म से परिचित करवाया अपितु ईश्वर के अस्तित्व का आभास भी कराया ।  उन्होंने धार्मिक आस्था के संदेश या आध्यात्मिक प्रवृत्तियों का आचरण करने से पूर्व स्वयं उन्हें धारण किया और उसके बाद दूसरों को इना चरणों से परिचित करवाया । उनका धर्म परंपराओं को मानने के साथ-साथ नव प्रयोग करने के लिए भी जाना जाता था वह धर्म को नए रूप में प्रस्तुत करना चाहते थे हमारी मान्य परंपराओं में जो हमारी कुर्तियां थी सामाजिक उनसे भी बड़े दुखी थे वह हमेशा अपने अनुयायियों को धर्म की शुद्धता और पवित्रता को सामाजिक उत्थान करने के लिए प्रेरित करते थे इसी कारण पूरा विश्व आज उन्हें डेढ़ सौ साल बाद भी नतमस्तक होकर याद करता है।  कार्यक्रम की अध्यक्षता लायंस क्लब क्लासिक के अध्यक्ष प्रदीप लोढ़ा ने की ।  मंच अध्यक्ष दिनेश शर्मा, विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद् ओपी मिश्रा, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. सुलोचना शर्मा, पूर्व अध्यक्ष कृष्ण चंद्र ठाकुर ने स्वामी जी के चित्र पर माल्यार्पण कर व्याख्यान का शुभारंभ किया । संस्था अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि विगत कई वर्षों से व्याख्यानमाला स्वामी जी के जीवन दर्शन को आमजन तथा विशेषकर शिक्षकों के लिए परिचित करवाने हेतु की जा रही है हम अपने शिक्षक की जीवन में स्वामी जी को किस तरह से आने वाली पीढ़ी से परिचित करवाएं यह हम सबका दायित्व बनता है । श्री कृष्ण चंद्र ठाकुर ने कहा कि विवेक जहां होता है वही आनंद की अनुभूति होती है स्वामी जी ने अपने नाम के अनुरूप पूरे जगत में आनंद का उत्सव निरूपित किया था । रक्षा के कुमार, नूतन मजावदिया ने भी स्वामी जी से जुड़े प्रसंगों को सुनाया । इस अवसर पर श्रीमती प्रतिभा चांदनी वाला गोपाल जोशी सुषमा श्रीवास्तव लायंस क्लब के रीजन चेयरपर्सन संजय गुणावत, मदनलाल मेहरा राधेश्याम तोगड़े, नरेंद्र सिंह राठौड़, दशरथ जोशी, अनिल जोशी, कमल सिंह राठौड़, रमेश परमार, स्नेह सचदेव आदि उपस्थित थे । कार्यक्रम का संचालन सचिव दिलीप वर्मा ने किया एवं आभार राधेश्याम तोगड़े ने व्यक्त किया । इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक गण व अन्य महानुभाव उपस्थित थे।